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सुभाषवादी भारतीय समाजवादी पार्टी (सुभास पार्टी)

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जब कभी कोई नई पार्टी सामने आती है तो एक आम आदमी के मन मस्तिष्क एक सवाल पैदा होता है कि इस नई पार्टी की क्या आवश्यकता है जब इतनी सारी पार्टियां पहले से ही मैदान में हैं।

किसी भी देश ने चाहे लोकतन्त्र की द्वि पार्टी ब्यवस्था अथवा बहु पार्टी व्यवस्था अपनाया है तो राजनीतिक दल से यह अपेक्षा की जाती है कि वो जनता को राजनीतिक रूप से प्रशिक्षित करें।हमारे देश में शुरुवाती दौर में आजादी के बाद यह कार्य कुछ स्तर पर किया भी जाता था लेकिन पिछले करीब 50 साल से इस कार्य में घोर कमी आई है। जनता को राजनीतिक रूप से प्रशिक्षित करने का कार्य कोई भी दल नहीं कर रहा है।  

      हमारी पार्टी सुभाषवादी भारतीय समाजवादी पार्टी (सुभास पार्टी) जिसमें तीन शब्द हैं। पहला सुभाषवादी जिससे अभिप्राय ज्ञात-अज्ञात उन करोड़ो लोगों के संघर्ष और कुर्बानी को जनता के सामने लाना है जिन्होनें भारत की आजादी के लिए स्वतन्त्रता से पहले तथा बाद में उस आजादी को बचाने के लिए कुर्बानी दी है। नतीजा सामने है समाज जाति-धर्म, क्षेत्र, भाषा में बटकर भ्रष्टाचार के दल-दल में डूबता जा रहा है।

      दूसरा शब्द भारतीय प्रतीक है, भारत के 130 करोड़ लोगों का, भारत की हजारों साल पुरानी संस्कृति का जिसका अभिप्राय है संयुक्त परिवार,सादगी,त्याग,आपसी भाईचारा। जिस महान संस्कृति का हमें संरक्षण करना है।

      तीसरा शब्द है समाजवाद जिसका भारत मेन सबसे पहले प्रयोग शहीद-ए-आजम भगत सिंह ने किया था। जिन्होनें कहा था कि ” भारत में जहाँ दर्जनो धर्म,भाषा, सैकड़ों बोलियाँ हैं, हजारों जातियाँ हैं, अगर आज से लोगों को एक साथ रहना न सिखाया गया तो देश आजाद तो हो जाएगा लेकिन एक भ्रष्ट, अंध धार्मिक, सांप्रदायिक समाज होगा।” शहीद-ए-आजम की भविष्यवाणी इस बात को लेकर सच साबित हुई। हमारे लिए आज समाजवाद का मतलब धार्मिक,जातिगत,आर्थिक सामाजिक बराबरी है जिसे लाने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।